आधी उम्र की नायिका!

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन

सलमान खान आलिया भट्ट के साथ फिल्म इंशाअल्लाह  करने वाले हैं। एकबारगी यह खबर  पढ़कर कोई भी आगे बढ़ जाएगा। पहली नज़र में इस तरह की सूचनाओं को इन सितारों के प्रशंसक भी संजीदगी से नहीं लेते क्योंकि हमारे देश में औसतन चार फिल्में एक दिन में अनाउंस होती हैं। कितनी दर्शकों तक पहुँचती यह बाद में पता चलता है। हम वापस सलमान-आलिया पर आते हैं। इस खबर में गौर करने लायक बात है, उम्र। सलमान 55 के हैं  और आलिया 25 की! सिने जगत के अधिकांश सितारे अपने से आधी उम्र की नायिकाओं के साथ काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यह चलन अभी शुरू हुआ है। हैरत की बात है कि यह परंपरा सिनेमाई इतिहास के साथ ही आरम्भ हो गई थी। हमारे अधिकांश उम्रदराज अभिनेता अपनी अधेड़ अवस्था तक नायक बनकर आते रहे हैं परन्तु उनके साथ नायिका बनकर आई अधिकांश अभिनेत्रियां या तो 40 की उम्र आते-आते विवाहित हो गयीं या फिर फिल्मों से ही रिटायर हो गईं। इंडस्ट्री में ऐसे उदाहरणों की भरमार है जब प्रतिभावान अभिनेत्रियों को  पैंतीस की उम्र तक पहुँचते ही विनम्रतापूर्वक कह दिया गया कि वे नायिका बनने की हद पार कर चुकी हैं, वे चाहे तो चरित्र किरदार निभा सकती हैं !

सत्तर के दशक में दुनिया भर में  हिप्पियों की जीवनशैली के दुष्परिणामों की चर्चा आम थी। इस विषय पर देवआनंद ने फिल्म बनाई हरे रामा हरे कृष्णा (1971) इस समय उनकी उम्र थी 48 बरस और नवोदित जीनत अमान 19 वर्ष की थीं। जीनत की ही तरह टीना मुनीम भी इस लिहाज से भाग्यशाली थीं कि उन्हें अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत करने का मौका सदाबहार हैंडसम देव आनंद के साथ मिला था। फिल्म थी, देस परदेस (1978) उस समय देव साहब 55 पार कर रहे थे और टीना 21वें बरस में कदम रख रही थीं। महानायक अमिताभ जिस समय अपने करियर की ढलान पर तेजी से लुढ़क रहे थे उस समय उनकी उम्र 57 साल हो चुकी थी परन्तु उसी साल लाल बादशाह (1999) में वे 29-वर्षीया मनीषा कोइराला के साथ प्रणय निवेदन करते नजर आ रहे थे!

ऐसा भी नहीं है कि आधी उम्र की नायिका का रिवाज  सिर्फ भारत में ही है।  इस लेवल पर हॉलीवुड भी हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। क्लासिक बन चुकी कासाब्लांका (1942) के नायक हम्फ्री बोगार्ट 48 बरस के थे और सौंदर्य की देवी कही गई नायिका  इंग्रिड बर्गमन 21 वर्ष की थीं। वुडी एलन की रोमांटिक कॉमेडी मैजिक इन मूनलाइट के नायक कोलिनफर्ट और नायिका एमा स्टोन की उम्र में 27 साल  का अंतर था। क्लिंट ईस्ट वुड, शॉन कॉनरी, रिचर्ड गेर, हरिसन फोर्ड, जैसे दर्जनों स्टार आज भी अपने से आधी उम्र से भी कम उम्र की नायिकाओं के साथ नजर आ रहे हैं।

हर काल में महिलाओ की सुंदरता पर विशेष जोर दिया जाता रहा है, फिर चाहे वे किसी भी क्षेत्र में काम करती हों।उनके युवा होने को विशेष महत्व दिया जाता रहा है।

चूँकि इस विषय पर दर्शकों की राय भिन्न रही है परन्तु ‘साइकोलॉजी टुडे’ एक तरह से समाज को आइना दिखा देता है।  इस प्रतिष्ठित पत्रिका के अनुसार फिल्म इंडस्ट्री ( ये हॉलीवुड / बॉलीवुड दोनों ही माने जा सकते हैं) समाज के मानदंडों को ही परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करती है। हर काल में महिलाओ की सुंदरता पर विशेष जोर दिया जाता रहा है, फिर चाहे वे किसी भी क्षेत्र में काम करती हों। उनके युवा होने को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। सामाजिक  रूप से अधिक आयु के पुरुषों को जिम्मेदार और भरोसेमंद माना जाता है। इस अवधारणा ने इस बात को भी न्यायोचित ठहरा दिया कि अधिक उम्र के पुरुष रिश्तों को लेकर गंभीर होते हैं। मिलेनिआ ट्रम्प अपने पति डोनाल्ड ट्रम्प से 24 वर्ष छोटी हैं वही मीडिया सम्राट मर्डोक अपनी पत्नी वेंडी वोंग से 37 वर्ष बड़े हैं! हमारे दिलीप कुमार और उनकी पत्नी सायरा बानो में 22 बरस का फासला है। रौबदार व्यक्तित्व के मालिक अभिनेता कबीर बेदी की तृतीय पत्नी उनसे 29 बरस छोटी हैं वहीं एक दौर के 53-वर्षीय चर्चित मॉडल मिलिंद सोमन की दूसरी पत्नी महज 27 बरस की हैं।

फिल्मों में इस तरह की शुरुआत जो एक बार शुरू हुई तो आज तक जारी है। इस भेदभाव पर समय-समय पर उँगलियाँ भी  उठती रही हैं। हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों ने अपने संकीर्ण सोच के चलते कई सशक्त और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों को इतिहास के घूरे पर पटक दिया है। हॉलीवुड जहाँ आज भी साठ पार की अभिनेत्रियों मेरिल स्ट्रिप, हेलन मीरन, कैथरीन जीटा जोंस, पचास पार की हेलन हंट, जोड़ी फोस्टर, मेग रायन के लिए उनकी उम्र के अनुसार फिल्में बना रहा है वैसा विशेषाधिकार हेमा , रेखा, माधुरी या मरहूम श्रीदेवी तब्बू, सोनाली बेंद्रे, रवीना टंडन, प्रिटी जिंटा को नहीं के बराबर मिला है। स्वीडन का एक शोध कहता है कि दंपतियों में चार से छह वर्ष का अंतर सफल वैवाहिक जीवन में ज्यादा मायने रखता है। पता नहीं वास्तविक जीवन और फिल्मों में इस बात को कब महसूस किया जाएगा !

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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