गांधी तेरे कितने रूप!

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शिखा कौशिक/

फिल्मकारों के लिए महात्मा गाँधी का जीवन हमेशा एक कौतुहल का विषय रहा है. जिसपर हर कोई फिल्म बनाना चाहता है. कई फिल्मकारों ने उनके जीवन के विभिन्न पहलूओं को बड़े परदे पर उतारा है.  आज गांधी जयंती पर हम कुछ ऐसे फिल्मों को आप के सामने ला रहे हैं जिसके मुख्य किरदार या तो गांधी हैं या उनके विचार. आप भी देखिये इन फिल्मों में कौन सा किरदार कितना गांधी लगता है.

 

गाँधी

 

जब 1893 में महात्मा गाँधी को दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव झेलना पड़ा था, तबसे लेकर उनकी अंतिम यात्रा तक को दर्शाती यह उनके जीवन पर बनी सबसे चर्चित फिल्म है. इसमें गाँधी का किरदार बेन किंग्सले ने निभाया था. इसका निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था. इस फिल्म ने आठ ऑस्कर अवार्ड जीते, जिसमें बेस्ट फिल्म और बेस्ट एक्टर का भी अवार्ड शामिल था. यह फिल्म 1982 में आई थी.[spacer height=”20px”]

द मेकिंग ऑफ़ द महात्मा

 

सन 1996 में श्याम बेनेगल ने यह फिल्म, महात्मा गाँधी के दक्षिण अफ्रीका वाले दिनों पर बनाई थी. यह फिल्म उन इक्कीस सालों की कहानी बयां करती है जो गाँधी ने वहां बिताये. फिल्म में नौजवान गाँधी का किरदार रजित कपूर ने निभाया है. इस फिल्म में अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था. यह फिल्म फातिमा मीर की किताब द एपरेंटिसशिप ऑफ़ ए महात्मा’  पर आधारित है. फातिमा ने इस फिल्म की पटकथा भी लिखी थी.

 

हे राम

कमल हसन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में महात्मा गाँधी की हत्या की बारीकियों को दिखाया गया है. सन 2000 में आई इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह गाँधी के तौर पर नज़र आते हैं. बंटवारे के बाद की  पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म उस समय गाँधी के हत्याओं द्वारा उनकी हत्या कि योजना और उनके मन में चल रही दुविधा को बखूबी दर्शाती है.

 

 लगे रहो मुन्ना भाई

 

सन 2006 में आई यह फिल्म वैसे तो एक कॉमेडी है, पर इस फिल्म ने महात्मा गाँधी और उनके विचारों से आम जनता को एक अलग तरीके से रूबरू कराया. दिलीप प्रभावल्कर इस फिल्म में महात्मा गाँधी बने हैं. उनके किरदार की काफी तारीफ़ हुई थी. संजय दत्त इस फिल्म में लीड रोल में थे और अरशद वारसी सहायक की भूमिका में. इस फिल्म ने गांधीगिरी शब्द को देश में काफी लोकप्रिय बना दिया.

गाँधी, माय फादर 

 

यह फिल्म महात्मा गाँधी के पुत्र हरिलाल गांधी की जीवनी पर बनी है. पिता और पुत्र के विरोधाभासी जीवन और व्यक्तित्व को दर्शाती यह फिल्म, उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर प्रकश डालती है. गाँधी और उनके पुत्र के सपने बिलकुल अलग थे. जहाँ हरिलाल विदेश जाकर पढ़ाई करना चाहते थे, वहीँ गाँधी की इच्छा थी की वे उनके साथ उनके आदर्शों और बड़े मुद्दों की लड़ाई में अपने पिता का साथ दें. फ़िरोज़ अब्बास खान निर्देशित इस फिल्म में दर्शन जरीवाला गाँधी की भूमिका में हैं. फिल्म 2007 में आई थी.

 

 डिअर फ्रेंड हिटलर

 

 यह फिल्म द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मोहनदास करमचंद गाँधी और नाज़ी पार्टी के लीडर और जर्मनी के तानाशाह अडोल्फ़ हिटलर के बीच हुए पत्र संवादों पर बनी है. यह फिल्म गांधीवाद और नाज़ीवाद  के बीच के अंतर को दर्शाते हुए गांधीवाद को बेहतर भी साबित करती है. 2011 में आई इस फिल्म में जिसका निर्देशन राकेश रंजन कुमार ने किया था, अविजित दत्त गाँधी की भूमिका में थे.

 

वेलकम बैक गाँधी

वेलकम बैक गाँधी जिसे मुधल्वर महात्मा के भी नाम से जाना जाता है, ए बालाकृष्णन द्वारा निर्देशित की गयी थी.  इस फिल्म में एस कंगाराज, गाँधी बने थे. यह फिल्म एक सोच पर बनी है. सोच यह कि क्या होगा यदि गाँधी वर्तमान भारत में वापस आ जाएँ. फिल्म 2014 में आई थी. इसे दो भाषाओँ हिंदी और तेलगू में रिलीज़ किया गया था. इसके अतिरिक्त दो और फिल्मों का यहाँ उल्लेख हैं जो वैसे तो डाक्यूमेंट्री हैं पर गांधी के जीवन दर्शन को बड़े सलीके से दर्शाती हैं.

 

 महात्मा गाँधी: ट्वेंटीएथ सेंचुरी प्रोफेट

महात्मा गाँधी के जीवन पर सबसे पहले एक डॉक्युमेंट्री बनी थी सन 1953 में. इस फिल्म के लिए ए के चेट्टियार 1937 से ही महात्मा गाँधी के जीवन के बहुत अनदेखे तथ्यों को जुगाड़ करने में लग गए थे. स्टैनले नील के निर्देशन में बनी यह फिल्म 1953 में अमेरिका में रिलीज़ हुई. हाल ही में इस फिल्म का नया डिजिटल वर्ज़न भी रिलीज़ किया गया है.

 

महात्मा: लाइफ ऑफ़ गाँधी, 1869-1948

यह फिल्म भी महात्मा गाँधी के जीवन पर बनी एक डॉक्युमेंट्री है. यह फिल्म उनके सत्य के तलाश की यात्रा में जीवन की असल कहानियां बताती हुई चलती है. यह बताती है कि कैसे हिंसा और नफरत से भरी दुनिया में इस इंसान ने शान्ति और अच्छाई के दम पर बुराई और अन्याय के खिलाफ एक इतनी बड़ी लड़ाई जीत ली.

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