एक धागे में बंधी फिल्मे

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन

अमेरिकन फिल्म ‘मेमेंटो’ (2000), स्पेनिश फिल्म ‘इर्रिवर्सिबल’ ( 2002 ), तमिल फिल्म ‘गजनी’ ( 2005 ), हिंदी फिल्म ‘गजनी’, (2008 ) में क्या बात कॉमन है? जिन दर्शकों ने इन चारों फिल्मों को डूबकर देखा है उनकी स्मृति में तुरंत इस सवाल का जवाब उभर सकता है। चारो ही फिल्मे एक ही विचार के विस्तार का परिणाम है। साधारण से विचार में भी अनगिनत अद्रश्य तंतु निकले हुए होते है जिनको थामकर कई कालजयी रचनाओं का सृजन किया जा सकता है। इस तरह के प्रयासों में समानताए होने के बाद भी उन्हें मौलिक ही माना जाता है।

मेटाफ़िज़िक्स दर्शनशास्त्र की शाखा है जो मस्तिष्क में उठने वाले आधारभूत प्रश्नों के जवाब खोजने का प्रयास करती है। किसी अवधारणा की प्रकृति क्या है या मनुष्य के होने , उसके अस्तित्व और यथार्थ ,अनजाने भविष्य जैसी गूढ़ और दुरूह लगने वाली बाधाओं के समाधान प्रस्तुत करती है।

अमेरिकन निर्माता निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन ने इस तरह के उबाऊ लगने वाले विषयों पर दिलचस्प और सफल फिल्मे बनाई है। उनकी एक फिल्म ‘इन्सेप्शन’ में नायक खलनायक के सपनों में प्रवेशकर षड़यंत्र को रोकता है। नोलन की ही ‘मेमेंटो’ का नायक ‘एन्डरग्राड एम्नेसिआ’ से पीड़ित है जिसकी वजह से उसकी स्मृतियाँ पांच मिनिट से ज्यादा नहीं रह पाती। यह बिमारी उसे एक प्राणघातक चोंट की वजह से लगी है। नोलन ने दर्शको को नायक की मनोस्तिथि बताने के लिए ब्लैक एंड वाइट एव कलर दृश्यों की सीक्वेंस का सहारा लिया था। जब भी उसकी याददाश्त जाती है द्रश्य ब्लैक एंड वाइट में बदल जाता है। इस दौरान वह जो भी कुछ करता है उसे याद नहीं रहता। और यही द्रश्य सबसे पहले आता है।

मेमेंटो से प्रेरित होकर फ्रेंच डायरेक्टर गॉस्पेर नोए ने अनूठा प्रयोग किया। उन्होंने मात्र तेरह द्रश्यों की सहायता से क्राइम थ्रिलर ‘इर्रिवर्सिबल’ बनाई। यह पूरी फिल्म ही रिवर्स में चलती है। मतलब फिल्म का अंतिम तेरहवाँ द्रश्य सबसे पहले दिखाया जाता है फिर बारहवा फिर ग्यारवा। यह फिल्म नग्नता , हिंसा और क्रूरता से भरपूर थी। गॉस्पेर ने कैमरे के साथ भी प्रयोग किया। पूरी फिल्म में कैमरा एक जगह भी स्थिर नहीं रहता वह लगातार घूमता रहता है। सिर्फ दुष्कर्म के नो मिनिट के सीन में एक ही जगह ठिठक कर रुक जाता है।जैसे दशहत भरा कोई व्यक्ति टकटकी लगाए अपराध होते देख रहा है। । इसी तरह मर्डर के एक मिनिट के सीन में भौंचक हो ठिठक जाता है। ।यह ऐसी फिल्म है जो हर कोई नहीं देखना चाहेगा। दोनों ही फिल्मों में पात्रों की भावनाओ और परिस्तिथियों की वजह से उनकी असहाय स्थिति का बेहतरीन चित्रण है। आम आदमी परिस्तिथिवश किस तरह बदल जाता है यही बात ये फिल्मे बगैर लाग लपेट के दर्शाती है। तमिल निर्देशक मुरुगदास ने मेमेंटो के नायक की शार्ट टर्म मेमोरी को प्रेमकहानी में डुबाकर ‘गजनी ‘ बनाई जो बेहद सफल रही। इसे तेलुगु में भी बनाया गया और हिंदी में भी। इन तीनो ही फिल्मों की नायिका ‘ असिन ही रही और निर्देशक मुरुगदास रहे। यद्धपि उस दौर में आमिर खान पर आरोप लगे थे कि वे किसी हॉलिवुड फिल्म की नक़ल कर रहे है परन्तु गजनी की सफलता ने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए थे ।

ये सभी फिल्मे इस बात पर फोकस करती है कि हमें अगर भविष्य पूरी तरह ज्ञात हो जाए तो जीवन असहनीय हो जाएगा। जीवन का आनंद उसकी निर्दोष अज्ञानता में ही निहित है। यद्धपि यह सच इन फिल्मों ने बहुत ही हिंसक और क्रूर तरीके से दर्शाया है।

सुजॉय घोष ने ‘इर्रिवर्सिबल’ के राइट्स खरीद कर उसे हिंदी मे अमिताभ बच्चन और तापसी पुन्नू के साथ बनाने की घोषणा की है।

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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