ये सात फिल्में आपको घर बैठे बनारस की सैर करवा देंगी

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शिखा कौशिक/

पिछले कुछ समय में बनारस काफी चर्चाओं में रहा है. और अब तो यहाँ पर्यटन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. इस रिलीजियस टूरिज्म कहते हैं. यूँ तो बनारस अपने घाट, मंदिरों और तंग गलियों के लिए जाना जाता है. पर इस शहर के कुछ और भी अनछुए पहलू हैं जिनपर फिल्मकारों की नज़र गयी और उन्होंने इसे बखूबी उभारने का प्रयास भी किया. ये हैं बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी कुछ फिल्में जिनके द्वारा आप घर बैठे बनारस को जान समझ सकते हैं:

मुक्ति भवन (2017)

मुक्ति भवन बुढ़ापे और मृत्यु पर बनी एक फिल्म है जिसका कि काफी बड़ा हिस्सा बनारस में ही फिल्माया गया  है. यह फिल्म एक बेटे के जीवन के इर्दगिर्द घुमती है जो कि अपने पिता को तीर्थ पर बनारस ले जाना चाहता है. क्योंकि पिता ये चाहते हैं कि वे अपनी अंतिम सांसें इस पवित्र नगरी में लें,उन्हें लगता है कि इसी से उन्हें मुक्ति मिलेगी. फिल्म इस शहर की वास्तविक झलक दिखाती है.

मसान (2015)

बनारस की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म मूल रूप से अपने किरदारों की दुनिया और उस दुनिया में उनसे जुड़ी समस्यायों को ही फोकस में रखती है.  यह फिल्म काफी पसंद की गयी और आलोचकों ने भी इस फिल्म की काफी प्रशंसा की थी. बनारस के घाट और गलियाँ इस फिल्म की पटकथा में बहुत ही बारीकी से पिरोये गए हैं. ये सब जीवन और मृत्यु के सच को दर्शाने वाली इस कहानी की पृष्ठभूमि के तौर पर बेहतरीन काम करते हैं.

मोहल्ला अस्सी 

मोहल्ला अस्सी फिल्म की चर्चा ट्रेलर के रिलीज़ से भी पहले ही शुरू हो गई थी. असल में इस फिल्म का ट्रेलर इंटरनेट पर लीक हो गया था जिसने इस फ़िल्म के बारे में लोगों की दिलचस्पी  बढ़ा दी. यह फिल्म काशी का अस्सी नामक हिंदी उपन्यास पर आधारित है. फिल्म में सनी देओल मुख्य भूमिका में हैं जो कि फिल्म में एक बनारसी पण्डे की भूमिका निभाते हैं. इस फ़िल्म को पूरी तरह से बनारस में शूट किया गया है. फिल्म अपने कुछ विवादित दृश्यों की वजह से कानूनी पचड़े में फंस गयी थी. इस फिल्म को अब ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया गया है और इस साल होली के आसपास इसके रिलीज़ होने की उम्मीद है. 

रांझणा (2013)

आनंद एल राय के निर्देशन में बनी इस फिल्म रांझणा से साउथ इंडियन फिल्म के सुपरस्टार धनुष ने बॉलीवुड में अपनी एंट्री दर्ज की थी. फिल्म बनारस की पृष्ठभूमि पर बनाई गयी है. फिल्म में धनुष एक आम बनारसी लड़के की भूमिका में हैं जो कि एक लड़की के प्यार में पड़ जाता है. यह फिल्म अपने दोनों किरदारों की इस एकतरफा प्रेम की कहानी के साथ बनारस के घाट और गलियों की सुन्दरता को बखूबी बड़े परदे पर उकेरती है.

धर्म (2007)

यह एक हिन्दू पंडित की कहानी है. वह शहर (बनारस) के सबसे आदरणीय पंडितों में से एक है. एक ऐसा व्यक्ति जिसके लिए उसका धर्म ही सबकुछ है और वह इसी को जीता है. वह अपने नियमों का पूरा पालन करता है और अधिकतर समय पूजा पाठ या बच्चों को धर्म की शिक्षा देने में लगता है. नियमों के मामले में काफी सख्त होने के बावजूद भी अन्दर से वह एक कोमल इंसान है. एक दिन अचानक उसकी बेटी एक बच्चे को लेकर आ जाती है जो उसे ऐसे ही अकेला पड़ा मिला था. इसके बाद कहानी एक नया मोड़ लेती है. पंकज कपूर का अभिनय हमेशा की तरह बहुत ही बेहतरीन है.फिल्म बनारस की सुबह और शामों की सुन्दरता को दर्शकों तक लाने में सफल रहती है.

लागा चुनरी में दाग (2007)

रानी मुख़र्जी, और कोंकणा सेन समेत बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों के साथ बनी फिल्म लागा चुनरी में दागबनारस के एक लोअर मिडिल क्लास परिवार की कहानी है. यह एक ऐसा परिवार है जहां आर्थिक तंगी बनी रहती है. इस समस्या से निपटने के लिए परिवार की बड़ी बेटी यानि रानी मुख़र्जी पैसे कमाने के लिए बम्बई चली जाती है. और वहां जाकर देह व्यापर मे लग जाती है ताकि अपने परिवार की आर्थिक रूप से मदद कर सके. साल 2007 में आई प्रदीप सरकार की यह फिल्म आलोचकों द्वारा काफी पसंद की गयी थी.

वाटर (2005)

दीपा मेहता की फिल्म वाटर एक लम्बे समय तक विवादों में घिरी रही. विवाद एकसमय पर इतना बढ़ गया था कि फिल्म के बनने में भी काफी मुश्किलें आईं. कैनेडियन फिल्म वाटरजिसका निर्देशन दीपा मेहता ने किया था,बनारस में रह रही विधवाओं की समस्याओं पर बनायी गयी थी. फिल्म सन् 1938 के आसपास के समय को दर्शाता है.  फिल्म में सीमा बिस्वास,लिजा रे और जॉन अब्राहम अहम भूमिका में हैं. फिल्म की कहानी और बेहतरीन अभिनय प्रदर्शन के लिए इसे दुनियाभर के आलोचकों ने काफी सराहा.

 

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