हम दोनों मिल के, कागज पे दिल के चिठ्ठी लिखेंगे, जवाब आयेगा!

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

साधारण फिल्मों के साथ ऐसी नियति जुड़ी होती है कि वे बहुत जल्द भुला दी जाती हैं। सच भी है कि जब तक उन में कोई असाधारण बात न हो, भला कोई क्योंकर उनका जिक्र करेगा! हमारी स्मृतियाँ भी इसी पैटर्न पर चलती हैं! चार दशक पहले आई फिल्म ‘तुम्हारी कसम (1978 ) ऐसी फिल्म है जिसे उसके नायक नायिका या कथानक के बजाए सिर्फ एक गीत की वजह से याद किया जाता है।

इस फिल्म की स्टार कास्ट उस समय के लिहाज से बिकाऊ टिकाऊ  थी। मुख्य भूमिका में हैंडसम जितेन्द्र थे जिनके नाम इस समय तक दर्जन से अधिक सफल और लोकप्रिय फिल्में थीं। नायिका सुन्दर सी मौसमी चटर्जी थीं जिन्हे इस समय देश की प्रमुख सफल  नायिकाओ में गिना जाता था। क्लोज़अप में उनकी मुस्कान के बीच झलकती दंतपंक्ति भी दर्शकों में ख़ासी अपील रखती थी। शिफॉन की चित्ताकर्षक साड़ियों में लिपटा उनका व्यक्तित्व ऐसी युवती का था जिसमे बाल सुलभ भाव करीने से संजोये हुए थे। आकर्षक सुसंस्कृत नवीन निश्चल थे जो अपने सलीके से संवाद बोलने और सौम्य शक्लो-सूरत की वजह से एकबारगी राजेश खन्ना के बाद रोमांस की मशाल थामने योग्य संभावित नायकों में जगह बना चुके थे। बदकिस्मती से हिंसा और मारधाड़ वाली फिल्मों का चलन आरंभ होने के बाद जब राजेश खन्ना अपनी सल्तनत नहीं बचा पाए, तो नवीन निश्चल की संभावनाएं भी कम होने लगीं।

लेकिन फिर भी उन्हें पसंद किया जाता था। नवीन के साथ एक और उल्लेखनीय बात इत्तेफाकन जुड़ जाती है कि उनकी पूर्व में की गई लगभग सभी फिल्मों में उनपर फिल्माए गीत लोकप्रिय होकर संगीत प्रेमियों की जुबान पर थे और आज भी हैं! ‘सिमटी सी शरमाई सी किस दुनिया से तुम आई हो –परवाना ,’रात कली एक ख्वाब में आई ‘ और ‘ भली भली सी एक सूरत भला से एक नाम – बुड्ढा मिल गया , देखा मेने देखा सपनो की एक रानी को – विक्टोरिया न 203,’ तुम जो मिल गए हो तो ये लगता है कि जहां मिल गया ‘ और ‘ ये माना मेरी जां मोहब्बत सजा है ‘- हँसते जख्म ‘  जैसे कुछ उदाहरण इस संयोग को पुख्ता करते हैं। तुम्हारी कसम’ का यह गीत भी ऐसा ही संयोग है जो कालजयी हो गया। इस अमर गीत को अमर बनाने में पार्श्व गायक मुकेश और आशा भोंसले की आवाज के जादू का उतना ही योगदान जितना आनंद बक्शी के शब्दों का है और उतना ही संगीतकार राजेश रोशन का भी!

इतने सारे प्लस होते हुए भी फिल्म नहीं चली क्योंकि कहानी बहुत उबाऊ थी! लेकिन  गीत चला, बहुत चला और आज तक चल रहा है ! गीत ‘हम दोनों मिलके, कागज़ पे दिल के चिट्ठी लिखेंगे -जवाब आएगा ‘आज बयालीस बरस बाद भी कान में पड़ जाए तो चलते क़दमों को ठिठका देता है। यह गीत दरअसल एक प्रेम कविता है जो अविवाहित प्रेमियों के मन की रूमानी कल्पनाओ की बात करती है। फिल्म में इसे शादीशुदा जोड़े (नवीन निश्चल पद्मिनी कपिला) पर फिल्माया गया है। संभवतः इसी चूक की वजह से इतने मोहक शब्द, सुर, संगीत के बावजूद छायांकन में वह रूमानी प्रभाव पैदा नहीं हो सका जो इसे दर्शनीय बना पाता! गीत श्रवणीय बनकर रह गया!
इस गीत को यहाँ पढ़े और यूट्यूब पर देखें/सुनें!

ये ना होगा
नही, होगा होगा
कैसे?
मानो तुम अगर मेरा कहना हम दोनों मिल के,
कागज पे दिल के चिठ्ठी लिखेंगे,
जवाब आयेगा चिठ्ठी के लिफाफे पे नाम क्या लिखेंगे
नाम छोड़ो पूछो के पैगाम क्या लिखेंगे
लिखेंगे के चिठ्ठी मिलते ही चले आओ
बागों में फूलों के खिलते ही चले आओ
चमकेंगे तारे, दिल में हमारे
और बन के वो मेहताब आयेगा

वादा था तुम्हारा दोगे तुम इक निशानी
दूँगा अभी तो है बाकी सारी जिंदगानी
जब हम ना होंगे, तब शायद ये बात हो
हो सकता है आज ही वो प्यार भरी रात हो
है वो सफ़र में, इस सुने घर में

बन के मेहमान वो जनाब आयेगा!

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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