‘पद्मावत’ देख लगा, जैसे मैं ‘योनि’ मात्र हूं : स्वरा भास्कर

0

सौतुक डेस्क/

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ देखने के बाद बेहद तीखा बयान दिया है। भास्कर ने संजय लीला भंसाली के नाम लिखे खुले पत्र में कहा है कि यह फिल्म जौहर का महिमामंडन करती है और इस तरह एक महिला को महज एक योनि मात्र का ही महत्व देती है।

“फिल्म देखने के बाद मैं खुद को योनि मात्र महसूस कर रही हूं।” उन्होंने सवाल उठाया है कि किसी विधवा, दुष्कर्म पीड़िता, युवती, वृद्धा, गर्भवती या किसी किशोरी को जीने का अधिकार है या नहीं।

उन्होंने भंसाली को याद दिलाया कि मानव समाज इतना आगे आ गया है कि ऐसी सोच यानि सती प्रथा को प्रोत्साहन देना या समर्थन करना एक अपराध की श्रेणी में आता है। यह फिल्म जौहर का महिमामंडन करते हुए यही करती है।

शनिवार रात ‘द वायर’ पर प्रकाशित उनके खुले पत्र में स्वरा ने फिल्म में ‘सती’ और ‘जौहर’ जैसी आत्मबलिदान के रिवाजों के महिमामंडन की निंदा की। इन्होने लिखा कि सिर्फ पीरियड ड्रामा कहकर सबकुछ सही नहीं ठहराया जा सकता। इस तर्क से तो इतिहास की बहुत सारी ऐसी घटनाएं हैं जिसका मानव समाज अब निंदा करता है, उसको कुछ लोग जनता के सामने परोस देंगे। जैसे अश्वेतों को गुलाम बनाना इत्यादि। लेकिन ऐसा नहीं होता क्योंकि समाज बहुत आगे आ गया है और ऐसे विषय को छूते हुए हम उनका महिमामंडन न कर कहीं न कहीं उनकी भर्त्सना करते हैं। जबकि संजय लीला भंसाली ने इस फिल्म में ‘जौहर’ यानि एक ख़ास तरह के सती प्रथा का महिमामंडन किया है।

संजय लीला भंसाली ने इस फिल्म में ‘जौहर’ यानि एक ख़ास तरह के सती प्रथा का महिमामंडन किया है और यह अपराध की श्रेणी में आता है

अनारकली ऑफ आरा’ की अभिनेत्री ने भंसाली को इतनी परेशानियों के बावजूद ‘पद्मावत’ को रिलीज करने के लिए बधाई देते हुए अपने पत्र की शुरुआत की। लेकिन यह साफ़ शब्दों में स्पष्ट किया कि अगर खुदा न खास्ते एक महिला का पति मर जाता है और उसे किसी का गुलाम बनना पड़ता है तो उसे जीवन ही स्वीकार होना चाहिए। क्योंकि एक महिला का अपना भी एक अस्तित्व है।

अभिनेत्री ने फिल्म देखने के बाद अपनी चिंताएं सोशल मीडिया पर बांटने का निश्चय किया। उन्होंने दो टूक कहा कि फिल्म ‘पद्मावत’ ने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उन्होंने लिखा कि बड़ी उम्मीद से वे पूरे परिवार के साथ पहले दिन का पहला शो देखने गईं लेकिन फिल्म का अंत उन्हें निराश कर दिया।

उन्होंने लिखा कि वे संजय लीला भंसाली को बड़ा निर्देशक मानती रही हैं और इसके लिए उन्होंने संजय के साथ काम करने का अपना अनुभव भी साझा किया। लेकिन इस फिल्म ने उन्हें निराश किया है।

वे लिखती हैं, “आपकी महान रचना के अंत में मुझे यही लगा। मुझे लगा कि मैं एक योनि हूं। मुझे लगा कि मैं योनि तक सीमित होकर रह गई हूं।” इसका मतलब कि अगर एक महिला की योनि पुरुष सत्ता के तय किये मूल्य पर खरे नहीं उतरते तो उस महिला को जीने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने लिखा, “मुझे ऐसा लगा कि महिलाओं और महिला आंदोलनों को वर्षो बाद जो सभी छोटी उपलब्धियां, जैसे मतदान का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, ‘समान काम समान वेतन’ का अधिकार, मातृत्व अवकाश, विशाखा आदेश का मामला, बच्चा गोद लेने का अधिकार मिले.. सभी तर्कहीन थे। क्योंकि हम वापस मूल प्रश्न पर लौट आए, वह यह कि अगर हम अपने योनि को सुरक्षित रखने में नाकामयाब रहे तो हमें जीने का कोई अधिकार नहीं है।”

उन्होंने लिखा, “हम जीने के अधिकार के मूल प्रश्न पर लौट आए। आपकी फिल्म देखकर लगा कि हम उसी काले अध्याय के प्रश्न पर ही पहुंच गए हैं कि क्या विधवा, दुष्कर्म पीड़िता, युवती, वृद्धा, गर्भवती, किशोरी को जीने का अधिकार है?”

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को दुष्कर्म के बाद पति, पुरुष रक्षक, मालिक और महिलाओं की सेक्सुएलिटी तय करने वाले, आप उन्हें जो भी समझते हों, उनकी मृत्यु के बाद भी महिलाओं को स्वतंत्र होकर जीने का हक है।

उन्होंने फिल्म के आखिरी दृश्य को बहुत ज्यादा असहज बताया, जिसमें अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (रानी पद्मावती) कुछ महिलाओं के साथ जौहर कर रही थीं।

उन्होंने कहा, “महिलाएं चलती फिरती योनि मात्र नहीं हैं। हां, उनके पास योनि है, लेकिन उनके पास उससे भी ज्यादा बहुत कुछ है। उनकी पूरी जिंदगी योनि पर ही ध्यान केंद्रित करने, उस पर नियंत्रण करने, उसकी रक्षा करने और उसे पवित्र बनाए रखने के लिए नहीं है।”

उन्होंने कहा, “अच्छा होता अगर योनि सुरक्षित रहती। लेकिन दुर्भाग्यवश अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो भी उस महिला को जीने का अधिकार है, क्योंकि एक अन्य पुरुष ने बिना उसकी सहमति के उसकी योनि का अपमान किया है।”

उन्होंने लिखा कि योनि के अलावा भी दुनिया है, इसलिए दुष्कर्म के बाद भी वे जीवित रह सकती हैं। सपाट शब्दों में कहें, तो जीवन में योनि के अलावा भी बहुत कुछ है।

एक महिला के लिए उसके योनि के अलावा भी दुनिया है, इसलिए दुष्कर्म के बाद भी उसे जिन्दा रहने का पूरा अधिकार है

स्वरा ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि भंसाली अपनी इस फिल्म में ‘सतीप्रथा’ और ‘जौहर’ की कुछ हद तक निंदा करेंगे।

उन्होंने लिखा, “आपका सिनेमा मुख्य रूप से प्रेरणाशील, उद्बोधक और शक्तिशाली है। यह अपने दर्शकों की भावनाओं को नियंत्रित करता है। यह सोच को प्रभावित कर सकता है और सर, आप अपनी फिल्म में जो दिखा रहे हैं और बोल रहे हैं, इसके लिए सिर्फ आप ही जिम्मेदार हैं।”

पत्र के अंत में उन्होंने लिखा, “स्वरा भास्कर, जीवन की आकांक्षी”।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here