कैमरे में कैद एक तानाशाह!

0

रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

तानाशाह एक दिन अपने सपनो को पूरा कर ही लेते है। इस वाक्य को पढ़ते ही मस्तिष्क में एक-डेढ़ सदी के दौरान  धरती पर धकेले गए क्रूर तानाशाहों, शासकों के चित्र तैरने लगते है जिन्होंने अपने नृशंस क्रिया कलापों  से मानव जाति को सिहरा दिया। इनमे से अधिकांश के जीवन का अध्ययन एक अलग ही दृष्टिकोण से परिचय कराता है। गरीबी और संघर्ष में शुरुआत करते हुए ये लोग सत्ता हाथ में आते ही किस तरह बौराते है व अपने ही कैरीकेचर बनकर दुनिया को दहलाते हैं। शुरूआती दौर में इनकी मासूमियत, बोलने का लहज़ा, देशभक्ति, व्यवस्था को बदल देने का जोश लोगों का ध्यान सहज आकर्षित कर लेता है। सत्तर के दशक में यूगांडा को (1971-79 तक ) अपने आतंक से दहला देने वाले ईदी अमीन के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘जनरल ईदी अमीन दादा: ए सेल्फ पोर्टेट’(1974 ) को देखते हुए लगभग ऐसा ही महसूस होता है। फ्रेंच फिल्मकार बारबेट श्रोएडर अपने कैमरे से इस बातूनी तानाशाह की मानसिकता को पकड़ने का प्रयास करते हैं।

कई बार में फिल्माई गई इस डॉक्यूमेंट्री में ईदी अमीन कैमरे के समक्ष दोस्ताना ढंग से अपनी बात कहते नजर आते हैं।  उनकी मासूमियत देखकर विश्वास नहीं होता कि यह व्यक्ति लाखों नृशंस हत्याओं का गुनहगार ठहराया जा चुका है। अमूमन तानाशाह अपना एक तयशुदा विचार तंत्र विकसित करने के लिए बदनाम रहे हैं। ईदी अमीन भी इसी सूत्र का अनुसरण करते नजर आते हैं। वे सीधे सीधे अपने पूर्ववर्ती शासक पर आरोप लगाते हैं कि उनकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है और जल्द ही उनके द्वारा उठाये गए क़दमों से पुरे विश्व की नजर युगांडा पर होगी।

गरीबी और संघर्ष में शुरुआत करते हुए ये लोग सत्ता हाथ में आते ही किस तरह बौराते है व अपने ही कैरीकेचर बनकर दुनिया को दहलाते हैं

ईदी अपने अंतर्राष्ट्रीय मित्रों के बारे में भी विस्तार से बताते हैं। वे गर्व से वैश्विक बिरादरी के प्रमुख नेताओं को अपना मित्र बताते हुए इसराइल को सबक सिखाने की बात करते हैं। एक जगह वे ब्रिटेन को पराजित करने की बात करते हैं कि किस तरह ग्रेट ब्रिटेन को उन्होंने घुटनों पर ला दिया है।

बारबेट की यह डॉक्यूमेंट्री विगत और वर्तमान के शासकों की मानवीय कमजोरियों को पकड़ने में मदद करती है। अधिकांश नेता कब तानाशाही के किरदार में उतर जाते हैं, कैमरा उनकी महत्वकांक्षाओ को डिटेलिंग में उजागर कर देता है। बहुतेरे शासक  कैमरे के सामने अपना व्यक्तित्व लार्जर देन लाइफ प्रस्तुत करने के फेर में अक्सर सच बोल जाते हैं। एक दृश्य में अमीन अपनी मंत्रिपरिषद की मीटिंग लेते नजर आते हैं। यहाँ वे बताते है कि एक अच्छा मिनिस्टर क्या होता है! उसे रात को दो बजे भी जनता की सेवा के लिए तैयार रहना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा! कुछ दिनों बाद कैमरा नदी में बहती हुई एक लाश पर ज़ूम करता है। ईदी अमीन बताते हैं कि यह उनके विदेश मंत्री थे।

बारबेट श्रोएडर की डॉक्यूमेंट्री को फिल्माने के लिए अमीन ने पूरी आजादी दी थी परंतु हरेक दृश्य का रीप्ले देखकर ही वे अगला सीन फिल्मा पाते थे। फिर भी बारबेट ने चतुराई से कुछ ऐसे दृश्य भी शूट कर लिए जिन्हे वह क्रूर तानाशाह समझ नहीं पाया! एक दृश्य में अमीन डॉक्टरों को सम्बोधित करते नजर आते हैं। प्राइमरी तक शिक्षित अमीन का इतने शिक्षित समुदाय के सामने सहज होकर बैठने का अभिनय करना एवं हीनता के भावों को छुपाने का प्रयास  क्लोज अप शॉट में शानदार बन पड़ा है।

उत्सव प्रिय, नई  पोशाकों के शौकीन, जंगली जानवरों की बाते समझने वाले, खुद को ही उपाधियों और पदवियों से नवाजने वाले, एक खानसामे के सहायक के रूप में सेना में शामिल होने वाले इस तानाशाह ने कुल नौ विवाह किये थे जिससे उन्हें चौवन बच्चे पैदा हुए।

1974 के कैन्स फ़िल्मफेस्टिवल में इस डॉक्यूमेंट्री को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसके बाद विभिन्न फिल्मोत्सवों में भी इसका प्रदर्शन होता रहा है।

***

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here