एक सम्मानित साईकल चोर

0

रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

कल्पना सदैव सुहानी होती रही है और वास्तविकता (यथार्थ) हमेशा कठोर और खुरदरा। सिनेमा के परदे पर चुनचुनाती रोशनी ने सपनों की इतनी मोहक दुनिया बनायी है कि बरसों से करोड़ों दर्शक अपने जीवन की आपा-धापी, समस्याएं, तनाव, अधूरे सपनो की कसक, से मुक्ति के लिए सिनेमा के घाट पर आते रहे हैं। यह एक तरह से घर छोड़े बगैर पलायन कर जाने जैसा है। सिनेमा यथार्थ को तो नहीं बदल सकता परंतु आईना अवश्य दिखा सकता है। ये सपने, दर्शक के लिए तनाव मुक्त करने का सबब बनते हैं, बावजूद इन सपनों के, कुछ फिल्मकार ‘यथार्थ’ चित्रण का आग्रह लेकर फिल्म बनाते रहे हैं। और यह काम सिनेमा के हर काल में होता रहा है।

इसी तरह की एक पहल सन् 1949 में हुई थी जिसने इटालियन सिनेमा को सम्मानजनक स्थान पर बैठा दिया। सेकंड वर्ल्ड वार की समाप्ति 1945 के बाद युद्ध में शामिल अधिकाँश देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी अपने चरम पर थी।  यह यथार्थ था जिसे यूरोप के धनी देश भुगत रहे थे। और इसकी परिणीति हो रही थी आम आदमी की असहायता, कुंठा और निराशा में। निर्देशक विटोरी डी सिका ने इस सब को नजदीक से महसूस किया था और यही उनकी फिल्म द बाइसिकल थीफ का विषय वस्तु बना। नायक की भूमिका एक फैक्ट्री में काम  करने वाले मजदुर लैम्बर्टो मैगीओरानी ( Lamberto Maggiorani ) ने निभाई थी  6 वर्षीय पुत्र की भूमिका में सड़क पर फूल बेचने वाले के बेटे एंज़ो स्टेओला (Enzo Staiola) को चुना गया . ये थे इस रीयलिस्टिक फिल्म के रियल किरदार .

फिल्म की कहानी बहुत ही साधारण है . एंटोनियो रिक्की एक बेरोजगार है जिसका एक 6 साल का बेटा है, घर पर पत्नी और एक बेटी गोद  में है. काम मिलने की एक मात्र शर्त है साईकल का होना. घर की एक मात्र कीमती धरोहर पलंग की बेडशीट गिरवी रखकर सेकंड हैण्ड साइकिल खरीदी जाती है. दर्शक को मालूम है कि यह साइकिल चोरी होगी और ऐसा ही होता है. एक चोर साइकिल लेकर भाग जाता है. विकट हालात का और अधिक विकराल हो जाना. एंटोनियो अपने बेटे ब्रूनो के साथ बदहवास साइकिल ढूंढता है. निराशा और पराजय से पस्त उनके चेहरे दर्शक को अंदर तक हिला देते हैं. कथानक रोम का है परंतु चमचमाते आम शहरों में गरीबी और निराशा के हालात आपके अपने शहर जैसे ही हैं.

आधुनिकता और चकाचौन्ध पहले  मनुष्य को संवेदन शून्य करते हैं फिर उसे अमीर-गरीब की श्रेणी में बाँट देते हैं. महान चार्ली चैप्लिन ने अपनी साइलेंट फिल्मों में लाचारी और करुणा के भाव को उकेरा था. निर्देशक डी सिका ने इसी गहन पीड़ा को दर्शाकर चार्ली को अपनी आदरांजलि अर्पित की है .

सन् 1951 में ब्रिटिश पत्रिका साइट एंड साउंड ने द बाइसिकल थीफ को दुनिया की सर्वकालिक महान फिल्म घोषित किया था। 50 साल बाद 2001 में  एक और सर्वे ने इसे बेस्ट फिल्मों की सूची में छठा स्थान दिया। दुनिया का ऐसा कौन सा पुरस्कार है जो इस ब्लैक एंड ह्वाइट फिल्म को नहीं मिला, ऐसा कोई फिल्मकार, आलोचक, समीक्षक नहीं है जो इससे प्रभावित न हुआ हो।

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here