Sunday, February 17, 2019

स्वास्थ्य...

स्त्रीनामा

क्या सरकार निजी अस्पतालों में होने वाले सी-सेक्शन डिलीवरी दर पर...

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के अनुसार कुल प्रसवों में से सी सेक्शन के माध्यम से प्रसव की औसत दर सामान्यतः 10-15 प्रतिशत तक होनी चाहिए, लेकिन निजी अस्पतालों में यह करीब दर 75 प्रतिशत है. इस समस्या से निपटने के लिए सरकार के कदम कारगर साबित होंगे या नहीं?

आतंक का साया और कश्मीर: गर फिरदौस बर रुए जमीं अस्त...

रजनीश जे जैन/ पुलवामा की घटना के बाद माहौल में है -  शोक! निराशा! नाराजगी और स्तब्धता! यह मान लिया गया था कि सब कुछ...

भारत में मानक समय प्रणाली के रूप में दूसरे टाइम जोन...

सौतुक डेस्क/ राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला(एनपीएल) के अधिकारिक टाइम कीपर ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों- असम, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और अंडमान निकोबार...

कूँची-कलम

के सच्चिदानंदन की दो कविताएँ

मलयालम साहित्य में मॉडर्निज़्म के सशक्त हस्ताक्षर के सच्चिदानंदन को केरल सरकार के शीर्ष साहित्यिक सम्मान Ezhuthachan Purasakaram से नवाज़ा जायेगा. वे कवि होने...

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लोक

बघेली लोक कवि: दूसरी किश्त

बाबूलाल दहिया/(बाबूलाल दहिया बघेली भाषा के कवि हैं. साथ ही आप सर्जना सामजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंच, पिथौराबाद के अध्यक्ष भी हैं. बघेली कवियों...

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भारत में स्वच्छ पानी के बिना रहने वालों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक...

सौतुक डेस्क/ भारत में रहने वाले लगभग 16.3 करोड़ लोगों की स्वच्छ पानी तक पहुँच नहीं है, जो की विश्व में सबसे ज्यादा है. इस...

मेक इन इंडिया का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन ब्रेक इन इंडिया ने नई...

शिखा कौशिक/ सोमवार की शाम जब सबकी निगाहें एक दिन बाद आने वाले पांच विधानसभा चुनाव के नतीजों पर थी तब देश की अर्थव्यवस्था के...

दिल्ली की गन्दी हवा को भी अवसर में तब्दील कर दिया स्टार्टअप ने, जानिए...

शिखा कौशिक/ दिल्ली के हवा में बढ़ते प्रदूषण ने एक नया उद्योग खड़ा किया है. एक तरफ दिल्ली की हवा में सांस लेना दूभर हो...

दिवाली मनाने से पहले जानें पटाखा उद्योग से जुड़ी कुछ ज़रुरी बातें

अनिमेष नाथ/ दिवाली की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं. चारों तरफ इसी से जुड़ी चर्चा है. तमाम बातों में पटाखों पर होने वाली...

कौमार्य परिक्षण अब भी जारी, सयुंक्त राष्ट्र ने आवाज उठाई पर भारत अब भी...

अनिमेष नाथ/ जब देश में नवरात्रि का उत्सव चरम पर था और लड़कियाँ देवी के तौर पर देखी जा रही थीं, ठीक उसी समय एक 23 साल कीमहिला को इसलिए गरबे में शामिल होने से रोक दिया गया क्योंकि उसने पारंपरिक कौमार्य परिक्षण या कहें वर्जिनिटी टेस्ट मेंशामिल होने से मना कर दिया था. पुणे की रहने वाली इस महिला का नाम ऐश्वर्या तमाचिकर  है. इनका विवाह इसी साल मई महीने में विवेक तमाचिकर के साथसंपन्न हुआ. न केवल इस महिला ने, बल्कि उसके पति ने भी इस कौमार्य परिक्षण की कुप्रथा को मानने से इनकार करदिया. ऐश्वर्या शादी के पहले से ही इस कुप्रथा का विरोध कर रही थीं और इसके खिलाफ अभियान भी छेड़ रखा था. इक्कसवी सदी में भी प्रचलित इस कुप्रथा के बारे में आइये आपको बताते चलें. यह प्रथा कंजर भाट आदिवासी समुदाय में प्रचलित है जिसमें महिलायें, अपनी शादी की पहली रात सफ़ेद चादर लेकर सोने जाति हैं. सामाजिक...

एचआईवी से जंग: गरीबी और संक्रमण में सीधा रिश्ता

अनिमेष नाथ/ भारत एक ऐसा देश है जिसने न केवल खुद के एचआईवी की समस्या से लोहा लिया है बल्कि अफ़्रीकी देशों में संक्रमण को...

क्या नरेन्द्र मोदी की सरकार वाकई महिला हितैषी है? जानिये.

शिखा कौशिक/ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजस्थान के अज़मेर में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के भले के लिए काम...

स्टार्ट-अप

दिल्ली की गन्दी हवा को भी अवसर में तब्दील कर दिया...

शिखा कौशिक/ दिल्ली के हवा में बढ़ते प्रदूषण ने एक नया उद्योग खड़ा किया है. एक तरफ दिल्ली की हवा में सांस लेना दूभर हो...